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जयपुर में जहरीली सब्जियों का जाल | Poisonous vegetables in Jaipur

राजधानी जयपुर की चारदीवारी की सीवर लाइने, रंगाई के केमिकल और भी शहर के अस्पतालों और पता नहीं कितनी जगह का गन्दा और संक्रमित पानी आमेर रोड के जलमहल में जाकर मिल जाता है और जलमहल का यह पानी सड़कों पर ना छलके इसके लिये इस पानी को पीछे के रास्ते मानबाग-जयसिंह पुरा खोर की तरफ जा रहे नाले में छोड़ दिया जाता है। वहां से यह पानी कई छोटे नालें से घूमता-फिरता अन्त में कई किलोमीटर की यात्रा के बाद कानोता बांध में पहुंच जाता हैं। यह पानी जिन नालों से गुजरता है वहां आस-पास की करीब एक हजार बीघा पर गत कई वर्षों से धड़ल्ले से सब्जियां उगाई जा रही है। गंदे पानी में सब्जी की अच्छी पैदावार होने से किसानों ने खेतों में गेहूं, जौ, चना, बाजरा आदि बोना ही छोड़ दिया है। इस क्षेत्र में पैदा हो रही दूषित सब्जी शहर की करीब एक चौथाई आबादी तक सप्लाई की जा रही है। जलमहल से मानबाग होते हुए आमेर रोड, रामगढ़ रोड व जयसिंहपुरा खोर से कानोता बांध तक नालों में बह रहे इस जहरीले पानी से जयसिंहपुरा खोर, पीली की तलाई, जाजोलाई की तलाई, लालवास, सड़वा, नाई की थड़ी, जयसिंहपुरा खोर, मानबाग, सुमेल, रूपा की नांगल, सावड़ों की ढाणी, कांटी वालों की ढाणी, बाण्या की ढाणी, खारवालों की ढाणी, आंधा की ढाणी आदि में सब्जियां उगाई जा रही है। ये गांव जयपुर की मंडियों में होने वाली सब्जियों की आपूर्ति में एक चौथाई योगदान देते है।

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इन मंडियों में बिकती है सब्जी – ये दूषित सब्जियां मुख्य सब्जी मंडी मुहाना, लालकोठी, हसनपुरा, कंवर नगर, अम्बाबाड़ी, चांदपोल, गणगौरी बाजार,जौहरी बाजार, वैशाली नगर, सोढाला, श्याम नगर आदि छोटी-बड़ी मंडियों में बिकने के लिए आती हैं। नालो पर डीजल पंपों के जरिये पानी खीच कर उगाये जा रहे टमाटर, भिण्डी, लोकी, तुरई, गवारफली, मूली, गाजर, हरा धनियां, पोदीना, गोभी, पालक, बैंगन इत्यादी की सप्लाई शहर की सभी सब्जी मंडियों में है। सब्जी विक्रेता भी इनके सस्ते मिल जाने के कारण किसानों से इन्हें खरीद लेते है अब तो शहर के कई रेस्टोरेन्टों-ढाबों तक भी यह किसान सीधे सप्लाई करने लगे है। जलमहल से निकलने वाले गटर लाईन और नाग तलाई नाले के जहरीले पानी का मानबाग में तालाब बन गया है। इससे यहां पैदा की जा रही सब्जियों में ही नहीं जमीन और समूचे वातावरण में ही प्रदूषण फैल रहा है। दिल्ली बायपास पर बने इस तालाब से उठती बदबू के कारण आसपास के इलाके में लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी है। साथ ही, आसपास की सैकड़ों एकड़ जमीन में अच्छे पानी के साथ गंदा पानी मिल रहा है। घरों में दूषित पानी आने का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जयसिंहपुरा खोर में तो लोगों ने घरों में आर ओ प्लांट लगा रखे है। इतना सब होने पर भी सरकारी विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। हैरानी की बात है कि यह सब खेल धडल्ले से हो रहा है लगता है सरकार स्वयं ही इन पर कार्यवाही नहीं करके इन्हें प्रोत्साहित कर रही हैं। आज घर-घर में पड़े बीमार, सरकारी-निजी हॉस्पिटल्स के ओ पी डी में मरीजों की लगी कतारों में बहुत बड़ा हाथ इन जहरीली सब्जियों का है। संक्रमित और केमिकल युक्त पानी की सब्जियों की खेती को रोकने किसी भी विभाग का आगे नहीं आना बेहद चिन्ता का विषय है जब की पूरे शहर को आज इस खतरनाक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ”जब रोम जल रहा था तब नीरो चैन की बांसुरी बजा रहा था वैसे ही कुछ हालात आज जयपुर में भी बने हुये हैं।

आखिर जिम्मेदार कौन

हैरानी होती है कि जहरीली सब्जियों से पीडि़त मरीज मौत की ओर बढ़ रहे है, इलाज करवाते-करवाते उनकी जमा पूंजी समाप्त हो रही है लेकिन हमारी सरकार का कोई विभाग इन्हें रोकने के लिए कड़क कार्यवाही नहीं कर रहा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी आमजन को स्वस्थ रखने की है लेकिन वह भी कृषि विभाग पर ठीकरा फोड अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है और इनके बीच ‘पिस’ रहा है जयपुर का आम नागरिक।

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