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रेगिस्तान में जल क्रान्ति | Rajasthan Jal Swavlamban Yojana

हमारा राजस्थान जिसकी छवि और पहचान एक सूखाग्रस्त और तपते रेगिस्तान की मिट्टी सी बनी हुई है जहाँ दूर-दूर तक पीने के पानी का अभाव है। बात भी कुछ सही है क्योंकि राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है जहाँ सामान्य से भी काफी कम वर्षा होती है और जो थोड़ी वर्षा होती भी है तो उसका जल तपती धरती तुरन्त सोख लेती है। जाहिर है कि इन हालातों के चलते राजस्थान के बारे में सभी लोग यही छवि रखेंगे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हालात बदलने लगे है। राज्य में गत् वर्ष जनवरी 2016 के प्रारंभ हुयी मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के तहत वर्षा के जल को सहेजने के लिए प्रथम चरण में 96 हजार जगह जल संरक्षण कार्य कराये गये और 2016 के मानसून में इन जगह जल संग्रहित हुआ। यह एक ऐतिहासिक सफलता है, कल तक पीने के पानी के लिये परेशान राजस्थान की ग्रामीण आवाम को अब इन जल संरक्षण कार्यों के कारण खेती के लिये भी समुचित जल मिलने लगा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राज्य की सूखे की तस्वीर और यहाँ की आवाम की तकदीर बदलने के लिए कड़ी मेहनत और एक निश्चित विजन के साथ स्वयं अपनी निगरानी में मॉनिटरिंग करते हुये एक-एक जगह पर नजर रखी जिसके चलते आज राज्य में चला वर्षा जल बचाने का यह अभियान पहले चरण में पूरी तरह से सफल रहा और सचमुच ग्रामीण क्षेत्रों में खुशहाली नजर आने लगी है। हालाँकि अब दूसरे चरण की भी शुरूआत हो चुकी है। और जिसका संचालन भी राजस्थान नदी बेसन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण के अध्यक्ष, जल संचय और जलाशय के सुधार के विशेषज्ञ श्री राम वेदिरे कर रहे है।

मुख्यमंत्री श्रीमती वंसुधरा राजे की मंशा के अनुरूप मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान का पहला चरण देशभर में जन सहभागिता और सीमित समय में आशातीत उपलब्धियाँ देने वाला ऐतिहासिक अभियान सिद्ध हुआ है। इसमें पहली बार जीयो टेगिंग तथा मोबाइल एप्लीकेशन सहित सूचना एवं प्रौद्योगिकी का भरपूर इस्तेमाल किया गया है। द्वितीय चरण में सेटेलाइट मैपिंग, वे-पॉइन्ट एप्लीकेशन आदि के उपयोग के साथ ही ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमान किया जा रहा है। इसकेे साथ ही अभियान में वैज्ञानिक पहुंच और नैसर्गिक वाटरशेड मेप का भी प्रयोग किया गया।

 

अभियान बना जन आंदोलन

Jal Swavlamban Yojana
Source – Rajasthan Gov

मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के प्रथम चरण की सफलता में समाज के सभी वर्गों, सामाजिक संस्थाओं, पुलिस व सेना के जवानों, अधिकारियों, कर्मचारियों, कोर्पोरेट संस्थाओं तथा मीडिया द्वारा भी श्रम एवं सहयोग राशि प्राप्त हुई है। जन सहयोग एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लगभग 53 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है। इस प्रकार यह अभियान जन सहभागिता की दृष्टि से जन आंदोलन साबित हुआ है।

आंदोलन में प्रदेश के समग्र विकास की बुनियाद मजबूत कर सुनहरे विकास के महाअभियान की अवधारणा समाई हुई है। इससे कृषि क्षेत्र में स्प्रिंक्लर सिंचाई क्षेत्र को बढ़ावा मिलने, कृषि एवं उद्यानिकी से सम्बन्धित केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं में किसानों को जल मितव्ययता वाली

खेती-बाड़ी को बढ़ावा मिलेगा। अभियान के प्रथम चरण में 3,529 गांवों में 96 हजार से अधिक कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं, इससे प्रदेश में 41 लाख जलसंख्या के लिए पेयजल की उपलब्धता सुभल हुई है, वहीं 45 लाख मवेशियों के लिए भी पीने का पानी मुहय्या हुआ है। अभियान की खास विशेषता है यह है कि अधिकतर जल संग्रहण विकास कार्य ग्रामीणों की जन भागीदारी से किए जा रहे हैं। गांव वाले यह जान गए हैं कि वर्षा का जल व्यर्थ नही बहकर उनके खेत और गाँवों में ही रहे ताकि भूमि की आद्र्रता बनने के साथ ही कुएं एवं बावडियाँ भी जल से भर सकें और भूमि का जल स्तर ऊपर हा सके।

मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के प्रथम चरण की आशातीत उपलब्धियों ने इस अभियान को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दी है और अब देश-विदेश में इसके अनुकरण करने के प्रयास हो रहे हैं। वर्षा जल को बचाने के क्षेत्र में प्रदेश अब ट्रेंड सेंटर बन गया है। अभियान में गैर-मरूस्थलीय जिलों में स्टेगर्ड ट्रेंच, मिनी परकोलेशन टैंक, डीप सीसीडी तथा तालाब गहरे कराने का कार्य हाथ में लिया गया है। वहीं मरूस्थलीय जिलों में टांके बनाकर जल संरक्षण कार्य किया गया तथा चयनित गांवों में प्रत्येक खेत अथवा घर पर एक-एक जल संरक्षण संरचना स्वीकृत की गई है।

 

नवाचारों से देश का पहला राज्य बना

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Credits – Rajasthan Gov

मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान में जियो टेगिंग, मोबाइल एप्लीकेशन तथा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां जल संरक्षण कार्यों में तकनीकों का सफलतापूर्वक इस्तेमान किया जा रहा है।

 

पौधारोपण को मिला सम्बल

अभियान के प्रथम चरण में जहां साढ़े छत्तीस लाख पौधे लगाए गए वहीं दूसरे चरण में एक करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ये पौधे सभी 1.32 जल संरक्षण कार्यों पर लगाए जाएंगे तथा इस सभी पौधों का भी जीयो टेगिंग किया जाएगा। इन पौधों की 5 साल तक देख-रेख की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है।

 

मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान का दिखने लगा असर, प्रदेेश में पेयजल के टैंकरों की सप्लाई हुई आधी

Jal Swavlamban Yojana

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे का राजस्थान को जल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का सपना अब सच होता नजर आ रहा है। इसका पुख्ता प्रमाण यह है कि प्रदेश में पेयजल के लिए सप्लाई करने वाले टैंकरों का उपयोग घटकर आधा रह गया है। यह सब नतीजा है ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान का । इस अभियान की ख्याती देश ही नहीं विदेशों में फैल रही हैं। अभियान इसी तरह सफलता के सोपान चढ़ता रहा तो वह दिन जल्दी ही आएगा। जब राजस्थान पूर्ण रूप से जल स्वावलंबी बन जाएगा।

 

बधाई की पात्र हैमुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

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Source – Rajasthan Gov

राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है, वहीं यहाँ विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते हमारे पास जल स्रोत के न्यूनतम साधन है, हमारे राज्य का क्षेत्रफल देश का 10.4 प्रतिशत है। मगर यहाँ जल की उपलब्धता मात्र 1.16 प्रतिशत ही है, लगातार वर्षों से पड़ रहे अकाल, बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण ने हालात और बिगाड़ दिये है और हमारी करीब 78 प्रतिशत पेयजल योजनाओं का जल स्रोत भूजल ही है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जिस तरह यह हालात देखकर कर जल स्वावलम्बन अभियान प्रारंभ किया है, वह काबिले-तारीफ है और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इसके लिय बधाई की पात्र है।

– अरविन्द भूटानी 

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