Hello Jaipur

माल निकालो! वरना… जयपुर में गिरोहों की अवैध वसूली

केस – 1 – राजधानी जयपुर की एक पॉश कॉलोनी तिलक नगर एक जौहरी परिवार को शहर के एक अपराधी गिरोह ने गत तीन माह से 10 लाख रुपये की डिमांड उसकी आर्थिक स्थिति और परिवार को बर्बाद करने की धमकी देकर कर रखी थी उस गिरोह को अभी हाल ही में चार लाख रुपये देकर अपनी जान बचाई। अब उसे हर तीन माह में उससे एक निश्चित बंधी इस गिरोह ने बाँध ली है और इसकी ऐवज में उसकी और उसके परिवार की सुरक्षा का वादा भी इस गिरोह के लीडर ने किया है।

केस – 2 – विद्याधर नगर स्थित एक उद्योगपति की अत्यधिक जमीन-जायदाद और लग्जरी जिन्दगी देखकर उसे गत डेढ़ वर्ष से एक आपराधिक रंगदारी वाले गिरोह को निश्चित रकम देनी पड़ रही है, जब कि इस गिरोह से उसे दूर-दूर तक किसी तरह का लाभ नहीं है। इस परिवार को भी उसके बच्चों को उठा लेने के नाम पर धमकी दी गई। अब इस परिवार ने भी हर माह बँधी देकर किसी तरह अपनी जान बचाई हुई है।

केस – 3 – सी-स्कीम स्थित एक बिल्डर को तो शहर के एक नामचीन गिरोह के मुखिया ने गत दिनों अपने नये प्रोजेक्टों में एक-एक फ्लेट देने की माँग अपने कड़ रुख के कारण कर दी थी, बामुश्किल इस बिल्डर ने अपने सम्पर्क वाले कई उच्च अधिकारियों को बीच में डाल कर एक बड़ी रकम देकर अपनी जान छुड़ाई।

जी! हाँ, यह तो राजधानी जयपुर के मात्र तीन ही मामले है अभी तो ऐसे कई मामले है जिनमें शहर के कई व्यावसायियों को इस दादागिरी वाली अवैध वसूली का शिकार बनना पड़ रहा है। अपनी गाड़ी पसीने की कमाई को कोई वैसे ही उठाकर नहीं दे देता, इन शहर के व्यावसायियों को इसके लिये जान से मारने, बच्चों को उठा लेने, व्यापार तबाह कर देने, प्रतिस्पर्धी अथवा व्यावसायिक प्रतिद्वन्दी का सहयोग करने, आग लगा देने, दुर्घटना करने, इनकम टैक्स-कस्टम की रेड़ डलवाने जैसी कई किस्म की धमकियाँ चेहरा और समय देखकर दी जा रही है। चारदीवारी स्थित एक ज्वैलरी व्यावसायी ने बताया कि आठ माह पूर्व उसे पाँच लाख रुपये देने के लिये जयपुर सेन्ट्रल जेल में ही बन्द एक कैदी ने मोबाइल पर उसे कहा तो उसके पाँवों तले जमीन खिसक गयी कि आखिर जेल में उसके पास मोबाइल और फिर उसके बारे में जानकारी किसने दी। उसके इतने मजबूत नेटवर्क को देखते हुये पाँच दिन तक लगातार सौदेबाजी करने के बाद दो लाख में मामला सेट हुआ और मजबूरन उसे रकम देकर अपनी जान छुड़ाई। इस व्यावसायी ने इस गंभीर घटना के बाद अपना और अपने पूरे परिवार के मोबाइल नम्बर बदल लिये ताकि किसी हद तक कुछ बचाव हो सके।

आज शहर के कुछ वर्ग को इस तरह के रंगदारी वाले मामलों से दो-चार होना पड़ रहा है। शहर के कुछ पुलिस अधिकारी भी दबी जबान में इसे स्वीकारते है लेकिन पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने के लिये किसी के आगे नहीं आने से अवैध वसूली करने वालों के हौंसले बुलंद होते जा रहे है।

हालाँकि दिल्ली, मुम्बई, कोलकात्ता जैसे कई बड़े शहरों में यह रंगदारी की समस्या पुरानी है। राजस्थान में भी इण्डस्ट्रील एरिया और व्यापारिक क्षेत्रों से इस तरह की अवैध वसूली के मामले सामने आते रहे हैं। खासकर मकराना, किशनगढ़, कोटा जैसी जगहों से। वैसे गत वर्ष भी जोधपुर में भी एक नमकीन व्यावसायी पूनम सिंह को जैसलमेर हाईवे पर रंगदारी देने से मना करने पर गोली मार दी थी। इस व्यापारी ने पुलिस को बताया कि तीन माह से उससे बिना बात के आठ लाख रुपये मांगे जा रहे थे। या फिर गोलियाँ शरीर में भर देने की धमकियाँ दी जा रही थी। पुलिस ने इस मामले में दो गिरफ्तारियाँ करी। अवैध वसूली करने वाले गिरोह कुछ इस तरह का भयभीत माहौल बना देते हैं कि पूरे परिवार की रातों की नींद उड़ जाती है और हर वक्त दिमाग में भारी तनाव रहने लगता है जिसके चलते उसका व्यापार तक तबाही के कगार पर पहुँच जाता है। यही वजह है कि वह अपनी कमाई का कुछ हिस्सा ऐसे गिरोहों को देकर अपने दिमागी तनाव को कुछ समय के लिये मिटा देते है। राजधानी के शिखर पर पहुँच गये कई परिवारों को आज ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

गुड़ भी खाओ तो छिपा कर खाओ

विश्वकर्मा इण्डस्ट्रीयल एरिया के नामी उद्योगपति ने कहा कि पुरानी कहावत है ‘गुड़ भी खाओ तो छिपा कर खाओÓ बिल्कुल सही थी क्योंकि हमारा बेतहाशा खर्च का दिखावा एक तरह के रंगदारी करने वालों को आमंत्रित करता है वह यह नहीं देखते कि यह हमारे खून-पसीने से कमाया धन है जिसे हम अपनी मर्जी से व्यय कर रहे है लेकिन उन्हें इससे मतलब नहीं है वह हमारी विलासिता से ईष्र्या करते है। इस उद्योगपति ने कहा कि आज दिखवे का वक्त नहीं रह गया है।

जेल से मोबाइल, बढ़ा रहा घबराहट

अवैध वसूली के शिकार कई लोगों ने बताया कि उनके पास आने वाले फोन कॉल जेल में बन्द कैदियों के ही आते थे और उनकी दमदार धमकी और उनकी जेल में तगड़ी पहुँच के कारण उनकी घबराहट अथवा डर ओर अधिक बढ़ गया था और फिर मजबूरन उन्हें रकम देकर ही जान छुड़ानी पड़ी।

बढ़ रहा निजी सुरक्षा ऐजेंसियों और बाउंसर का व्यापार

शहर में धमकी देकर रुपये वसुलने के बढ़ रहे मामलों के चलते इसके शिकार कुछ लोगों ने निजी सुरक्षा ऐजेंसियों की शरण लेकर अपने यहाँ बाउंसर और गार्ड तक रख लिये है जिससे इनका व्यापार भी चल निकला है हालाँकि बड़ गिरोहों पर इनका असर नहीं पड़ता लेकिन छिटपुटिये जरूर पीदे हट जाते हैं।