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टोने-टोटको से होती है ट्रेफिक पुलिस की भिड़ंत | Exclusive News Jaipur Traffic Police

वल्र्ड क्लास सिटी की ओर बढ़ रहे हमारे शहर जयपुर में अभी भी अंधविश्वास के कई नमूने हमें कई चौराहों पर देखने को मिल जाते है। चौराहों पर रखी ट्रेफिक पुलिस की गुमटियों में या उसके नीचे यह टोने-टोटके की सामग्री नजर आ ही जाती है। सिंदूर, टीका, दीपक, आटे का पेड़ा, अगरबत्तियां, सिक्के, अंडे इत्यादि। आज जयपुर की ट्रेफिक पुलिस के जवान यह सब कुछ सबसे ज्यादा झेल रहे है। वह सुबह जब ड्यूटी पर पहुंचते है तो उन्हें कई बार इन टोने-टोटकों का सामना करना पड़ जाता है तब उन्हें गुमटी में जाने की बजाय सड़क किनारे खड़े होकर ट्रेफिक संचालित करना पड़ता है। देश के एक अग्रणी शहर माने जाने वाले जयपुर जिसे एज्यूकेशन टयूरिज्म हब बनाने की बात की जा रही है वहां ऐसे हालात सचमुच कमाल की बात हैं। शहर का शायद ही ऐसा कोई चौराहा हो जो कि इस तरह के टोने-टोटको से मुक्त हो यह समस्या पूरे शहर की है हमे तो उन यातायात पुलिस के कांस्टेबलों की हिम्मत की दाद देनी चाहिये जो इनसे डरने की बजाय यातायात सुचारू रखने के लिये इनकी परवाह किये बगैर डयूटी पर मुस्तैद बने रहते है।

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टोटके वाले चौराहे – तीन मूर्ति सर्किल, भगत सिंह चौराहा (सुभाष मार्ग), सरोजनी मार्ग, चौमू सर्किल, गर्वमेन्ट प्रेस सर्किल, त्रिपोलिया गेट, गलता गेट, 22 गोदाम सर्किल, पांच बत्ती, खासा कोठी सर्किल इत्यादी।

शनिवार-मंगलवार की रात ज्यादा-अलग-अलग चौराहों पर तैनात सिपाहियों ने बताया कि यह तांत्रिक क्रिया ज्यादातर शनिवार और मंगलवार रात को की जाती है। रविवार और बुधवार सुबह ड्यूटी पर आने पर गुमटियों पर टोटके का सामान बिखरा मिलता है। अमावस्या की रात के बाद भी सुबह टोटके का सामान बिखरा मिलता है। पुलिसकर्मियों के मुताबिक चौराहों पर काला कपड़ा, लाल कपड़ा, कटा नीबू, चाकू सिंदूर, ज्वार-गेहूं के दाने अक्सर मिलते है। कभी-कभी बलि के निशान भी मिलते हैं। ऐसे में आस-पास से किसी मजदूर के जरिए पिकेट की सफाई कराते है। अधिकारियों को भी यह परेशानी नहीं बता सकते।

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