Hello Jaipur

भगवान की सुरक्षा तो भगवान भरोसे

राजधानी जयपुर जो विश्वभर में गुलाबी नगरी के नाम से प्रसिद्ध है और इसी गुलाबी नगर को 13 मई 2008 को आतंकवादियों ने सीरियल बम धमाके करके खून से लाल कर दिया था। मंगलवार को ही हनुमान मन्दिरों को निशाना बना कर किये गये हमले में बड़ी संख्या में लोग मारे गये थे। और घायल भी हुये थे। पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल था और सवाईमानसिंह हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में घायलो की चीखे और चीत्कारें मन को दु:खी और गुस्सा दानों कर रही थी। सवाईमानसिंह हॉस्पिटल के मुर्दाघर की और रात के अंधेरे में लाशे लेकर जा रही टलीयों की कतारे एक खौफनाक मँजर बना रही थी। सवाईमानसिंह हॉस्पिटल का स्टाफ पुलिस और प्रशासन के तमाम अधिकारी अपनी जिम्मेदारी संभाले हुये थे। रात तीन बजे मैने जब अपने अन्य फोटो जर्नलिस्ट के साथपरकोटे में बम धमाके वाले स्थलों का दौरा किया तो सांगानेरी गेट से लेकर चांदपोल गेट तक के पूरे रास्ते में जले हुये माँस की दुर्गन्ध पूरे वातावरण में फैली हुई थी।

पाठकों 13 मई 2008 मंगलवार के उस वृत्तांत का यहाँ उल्लेख करना अति जरूरी है क्योकि इतने खतरनाक और दर्दनाक हादसे के बाद भी ना तो शहर प्रशासन जागा है और ना ही शहर की आवाम। सभी वह सब कुछ भूल कर पहले की तरह लापरवाह हो गये है। एक तरह से लगता है आंतिवादियों के लिए आसान टारगेट दुबारा बना दिये गये हैं।

सबसे पहली कड़ी में हम मन्दिरों की बात करते हैं। जो कि हरदम आतंकवादियों के निशाने पर रहते है। आज शहर के तमाम मन्दिरों में सुरक्षा के इन्तजाम देखे जायें तो वह नाकाफी और बेहद कमजोर हालात में हैं। जब की यही टारगेट पर रहते हे । शहर के भीड़भाड़ वाले मन्दिर खासकर मोतीडूंगरी, गणेशमन्दिर, गाविन्द देव जी, ताडकेश्वरजी, चांदपोल और सांगानेरी गेट हनुमान जी मन्दिर, झारखंड महादेव मन्दिर जैसे स्थलो पर भी आज सुरक्षा इन्तजाम काफी कमजोर हैं। हालांकी मेटल डिक्टेटर लगा दिये गये है। लेकिन उन्हें हैंडल करने वाला कोई नजर नहीं आता। इन पर हुआ व्यय एक तरह से बेकार साबित हो रहा हैं। हैलो जयपुर टीम ने शहर के कुछ मन्दिरों का दौरा कर वहां की सुरक्षा के हाल जाने और पाया कि हालात वाकई विकट है आज भगवान को और उनके भक्तों को सुरक्षा देना अत्यंत जरूरी है।

हमारी टीम सबसे पहले चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर मन्दिर पहुंची यहां यातायात पुलिस के जवान मन्दिर के बाहर ट्रेफिक तो मुस्तैदी से संभालते दिखे लेकिन जब अन्दर जाकर देखा तो सुरक्षा के नाम पर यहां कुछ नजर नहीं आया। भक्तों की भारी भीड़ जो प्रतिदिन यहां देर रात शयन आरती तक बनी रहती है उनकी सुरक्षा का यहां किसी तरह का इंतजाम नही होना हैरत की बात है। जब की यहां पुलिस के जवान, मेटल डिक्टेटर गेट, सी.सी. टीवी कैमरे सभी कुछ होना ही चाहिए। यहां ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया।

इसी तरह मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भी देखने को मिला यहां दोनों तरफ के प्रवेश दारों पर मेटल डिक्टेटर तो लगे है लेकिन उनसे बचाव के लिये साईड़ से भी रास्ते छोड़ रखे है जहां से कोई भी निकल सकता है जबकि मोती डूंगरी गणेश जी मन्दिर में विस्फोट होने से पहले ही प्लान कर रहे कुछ युवाओं को पुलिस पकड़ चुकी है। यह आतंकी युवा यहां बम ब्लास्ट करके जन-धन की भारी हानि पहुंचाने की फिराक में थे। गोविन्द देव जी मन्दिर में सुरक्षा व्यवस्था अन्य मन्दिरों की अपेक्षा काफी ठीक है जब की यहां भी अभी कई इंतजामों की जरूरत बनी हुयी है। चांदपोल और सांगानेरी गेट स्थित हनुमान जी मन्दिरों की सुरक्षा तो सिर्फ भगवान भरोसे ही है जब की यहीं पर 2008 में भारी बम ब्लास्ट भी हो चुके हैं।

”13 मई 2008 के बम धमाकों के बाद भी हालात जस के तस”

आतंकवादी धर्म स्थलों पर हमले कर यहां के साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाडऩा चाहते है और पूर्व में जयपुर में हुये ब्लास्ट भी जानबूझ कर मन्दिरों में किये गये थे लेकिन शान्तिप्रिय गुलाबी नगर के लोगों ने उस वक्त परिपक्वता का परिचय देते हुये सद्भाव बनाये रखा था। राज्य सरकार को शहर ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान के धर्म स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों की पुख्ता व्यवस्था करनी चाहिये ताकि आंतकवादियों के नापाक मसूंबे कभी पूरे ना हो पाये और राजस्थान में साम्प्रदायिक सद्भाव बना रहें।

होना तो यह चाहिये हर धार्मिक स्थल पर नाइट विजन वाले बढिय़ा क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरे लगे। श्रद्धालुओं के प्रवेश से निकास द्वार तक यह होने चाहिये।