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मौत बांट रही है हमारी सड़कें | Dangerous Roads in India

सड़क दुर्घटना जिसका खौफ वाहन चालक से ज्यादा घर बैठे उनके परिवारजनों को लगा रहता है और उनके घर लौटने तक यह खौफ बरकरार ही रहता है। यह डर की भावना परिवारजनों में होना वाजिब भी हैं क्योंकि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में जो इजाफा हो रहा है उसमें हजारों लोग असमय ही मौत के मुंह में जा रहे हैं और हजारों ही घायल होकर बिस्तरों पर पड़े हैं।

दिन-प्रतिदिन सड़क हादसों की खबरों में आमजन के मन-मस्तिष्क में सड़क दुर्घटनाओं का डर और गहरा कर दिया है। राजस्थान की सड़कों पर ही सड़क हादसों में मरने वालों के आंकड़े देखे तो इनकी भयावह स्थिति का अन्दाजा लग जाता है। राज्य की सड़कों पर बह रहे खून ने समाज को बेहद चिन्तित कर दिया है। सड़क दुर्घटनाओं पर काबू पाने के लिए सरकार भी ज्यादा संवेदनशील नहीं है पुलिस भी सिर्फ चालान करके सरकारी और अपना राजस्व बढ़ाने में सक्रियता से लगी हुई है जबकि होना तो यह चाहिये था कि पुलिस दुर्घटना वाले स्थलों पर आवश्यक सुधार करके उन स्थलों को दुर्घटना रहित बनाती और घायलों को तुरन्त इलाज मुहैया करवाने के लिए सभी सुविधाओं सहित एम्बुलैन्स तैयार खड़ी रखती लेकिन आज राजधानी जयपुर के भी हालात देखे तो काफी बदतर है सड़क दुर्घटना होने के बाद भी घायल काफी देर तक सड़क पर तड़पते रहते है जिस कारण ज्यादातर तो पुलिस जीप-ऑटो या 108 एम्बूलेंस में ही दम तोड़ देते है।

सरकार या पुलिस चाहे तो इन घायलों की जान बचाई जा सकती है अगर हर दो-तीन थाने को एक-एक एम्बुलेंस उपलब्ध करवायी जाये तो। वाहन चालकों के चालान करने से आये राजस्व का थोड़ा हिस्सा जन-सुविधाओं पर भी लगाया जाना चाहिए। बढ़ते वाहन, अतिक्रमण के कारण सिकुड़ती सड़के, ड्राइविंग लाइसेन्स बनवाने की आसान सुविधा, खराब सड़कें, अन्धे चौराहे, दिमागी जल्दबाजी और तनाव, यातायात सकेतंको का अभाव, तेज गति, प्रेशर हार्न, ओवर लोडिंग इत्यादि कई कारण सड़क दुर्घटना के पीछे है। सड़क पर बोझा हमने उनकी क्षमता से भी अधिक डाल दिया है जबकि इस बोझ को डालने से पहलें ना तो सड़कों का विस्तार किया है ना ही उन्हें अतिक्रमण मुक्त करके आवाजाही के लिए सुरक्षित बनाया है जिसके नतीजे में समाज को आज सड़क दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। वर्षों तक गढ्ढे सड़कों पर बने रहते है बल्कि वाहन चालकों को उनसे बचने की आदत पड़ गयी है लेकिन उन्हें भरने में प्रशासन हरदम और हर जगह सुस्त बना रहता है यह हालात तो राजधानी जयपुर तक में है सारे राज्य का हाल क्या होगा यह तो वहां दुर्घटनाग्रस्त होने वाले ज्यादा बेहतर बता सकते है।

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हैरान यह होती है राज्य सरकार इन मौतों को देख कर भी चेती नहीं है जबकि होना तो यह चाहिए था कि राज्य की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार युद्ध स्तर पर हर प्रयास करती चाहे इसके लिए उसे सड़क कानूनों में कड़क बदलाव क्यों नहीं करने पड़े। राज्य की आमजन की जिन्दगी को बचाने के लिये किये गये प्रयासों की समाज भी सराहना करेगा क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं का खौफ और दर्द सरकार से ज्यादा समाज महसूस करता है।

Anupan Setia

-Anupam Sethia

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