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जयपुर में है कबूतरों का हॉस्पिटल | Bird Hospital in Jaipur

राजधानी जयपुर में जौहरी बाजार के सांगानेरी गेट(Subodh School) के पास स्थित पक्षियों का एक ऐसा चिकित्सालय है जहां पक्षियों का ईलाज, भर्ती और शल्य चिकित्सा तक की जाती है वह भी पूरी तरह निशुल्क। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, जयपुर द्वारा संचालित यह चिकित्सालय सन् 1953 में एक छोटे स्तर पर प्रारम्भ किया गया था उस समय यहां रोजाना एक-दो पक्षी ही चिकित्सा के लिये लाये जाते थे, धीरे-धीरे इनकी संख्या में वृद्धि होती गयी और आज इसमें औसतन 15 से 20 पक्षियों का प्रतिदिन इलाज हो रहा है।

Photo by Hello Jaipur Team

यहां आने वाले पक्षियों में कबूतर, चिडिय़ा, चील, मोर इत्यादि होते है लेकिन यहां कबूतर सर्वाधिक संख्या में आते हैं। खासकर जनवरी में आने वाली मकर सक्रांति जब जयपुर के आकाश में तेज मांझे से उडऩे वाली पतंगें ही छायी होती है। तब पक्षियों के इस अस्पताल में पक्षियों की तादाद एकाएक बढ़ जाती है। इन दिनों में तो यहां स्टाफ तक बढ़ाना पड़ता है। खून से सराबोर पक्षी जब यहां लाये जाते है तो पहले उनकी मरहम्म पट्टी की जाती है फिर पानी और उन्हें विशेष भोजन करा कर भर्ती कर लिया जाता है। जब वह ठीक हो जाते है तो उन्हें विचरण हेतु आकाश में छोड़ दिया जाता है। पतंगबाजी के दिनों के अलावा यहां पखे से कटे, लकवा हो जाने या बुजर्ग पक्षी आते रहते है। यहां पिंजरों को ऐसी विशेष जाली लगाई गयी है। जिससे पक्षियों के पखों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचे, इस पक्षी अस्पताल में कबूतर कक्ष, चील-कौवों का और मोरों के लिये अलग-अलग कक्ष बने हुयें है। भर्ती पक्षियों में चीलों के लिये तली हुयी खास मंगौड़ी की व्यवस्था की जाती है।

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प्रात: 9 बजे खुलने वाले इस पक्षी अस्पताल में परिसर के बाहर एक पिजंरा रखा गया है जहां चौबीस घण्टे किसी भी वक्त कोई भी घायल पक्षी को लाकर छोड़ सकता हैं। इस पिंजरे में दवायें, ज्वार, पानी भी रखा है ताकि देर रात लाने वाला घायल पक्षी को तुरन्त दवा लगा सके साथ ही यहां घण्टी भी लगी है जिसे दबा कर चिकित्सालय में पक्षी की सूचना पहुंचायी जा सकती है। पक्षी चिकित्सालय का कर्मचारी तब पक्षी को अन्दर लेकर उपचार करते है और जरूरत पडऩे पर भर्ती भी कर लिया जाता है। पक्षी चिकित्सालय में दोपहर 12 बजे से पांच बजे तक वरिष्ठ कम्पाउडरों द्वारा मरहम पट्टी की जाती है और 3 से 4 बजे प्रतिदिन शल्य चिकित्सक भी यहां अपनी सेवाओं देने आते है। यहां के संयोजक Shri Suresh Chand Kothari ने बताया कि मूक बेबस पक्षियों का यहां हर संभव ईलाज किया जाता है और इलाज के बाद उसे एक ऐसे कक्ष में छोड़ दिया जाता है जहां कि खिड़की हमेशा खुली रहती है। ताकि वह अपने आपको ठीक महसूस होने पर एक बार फिर खुले आसमान में ऊँची उड़ान भर सकें।

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