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”अस्थियों” पर लावारिस का ठप्पा मंजूर नही

source : Just Science

जयपुर। आज जब सड़क पर जिन्दा पड़े घायलों को भी देखकर काफी लोग बगैर किसी प्रतिक्रिया के आगे बढ़ जाते हैं, वहीं इसी दौर में गुलाबी नगर जयपुर की एक शख्सियत ऐसी भी है जो लावारिस लाशों की अस्थियां गंगा नदी में प्रवाहित करने का बीड़ा उठाये हुये है। यह शख्सियत है बच्चों के जे.के. लॉन हॉस्पिटल में नर्सिंग इन्चार्ज के पद पर कार्यरत नीरज तम्बोलिया। तम्बोलिया ने 2010 से अभी तक करीब 650 लावारिस शवों की अस्थियों को प्रवाहित कर चुके है। हर माह हरिद्वार जाने वाले तम्बोलिया की इस मुहिम में अब कई लोग जुड़ गये हैं, उन्हें इस वर्ष 26 जनवरी को राजस्थान में मुख्यमंत्री और राज्यपाल द्वारा योग्यता प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया था और जे.के. लॉन हॉस्पिटल के अराजपत्रित कर्मचारियों में पहली बार नीरज तम्बोलिया ही इसके हकदार बने। लावारिस शवों की अस्थियों को प्रवाहित करने के शुरूआती दौर के बारे में तम्बोलिया ने बताया कि पहले परिवारजनों ने उन्हें देखकर रोकने की कोशिश की थी लेकिन मेरे कदम खुद ब खुद इस ओर चल पड़े, शायद कोई शक्ति थी जो यह सब कार्य मुझसे करवाना चाहती थी।

तम्बोलिया का कहना है कि आज परिवारजन, मित्र साथी कर्मचारी सभी आगे बढ़कर मेरा उत्साह बढ़ाते रहते हैं। अब तो हरिद्वार में जब नीरज तम्बोलिया और उनके साथी जाते हैं तो वहां पर गंगा प्रदूषण मुक्त अभियान से जुड़कर घाटों की सफाई भी करते हैं ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गंगा सफाई का सपना साकार हो सके। लावारिस शवों की अस्थियां तम्बोलिया शहर के शमशान घाटों से एकत्रित कर आदर्श नगर शमशान में जमा कर लेते है और फिर वहीं से रवानगी लेते है। इस पुनीत कार्य में आ रही समस्याओं के बारे में तम्बोलिया का कहना है कि पहले तो लावारिस शव मोक्ष धाम में पानी, बिजली और चौकीदार के कमरे की व्यवस्था होनी चाहिए, साथ ही लॉकर वाली अलमारियां भी हो जिनमें सम्मान के साथ अस्थियों को रखा जा सके और हरिद्वार जाने के लिए ट्रेनो-बसों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। तम्बोलिया का कहना है कि सरकार को एक एम्बूलेंस सिर्फ लावारिस अस्थियों के इन्तजाम के लिये रखनी चाहिये ताकि आने-जाने की सारी समस्या हल हो जाये। लावारिस शवों की अस्थियों को प्रवाहित करने, हॉस्पिटल, परिवार, समाज की जिम्मेदारियों में नीरज तम्बोलिया ने जो सफल समन्वय बैठा रखा है वह काबिले-तारीफ है। चलते-चलते तम्बोलिया ने कहा कि मरने वाले लोग लावारिस के रूप में जरूर गये है लेकिन उनकी अस्थियों पर लावारिस का ठप्पा लगा हुआ नहीं रह जाये बस! यही उनका मिशन है और इसे वह ताजिन्दगी निभाते रहना चाहते हैं।

– नीरज तम्बोलिया